कसम खिलाने पर एक परिवार का हुक्का-पानी बंद।

कसम खिलाने पर एक परिवार का हुक्का-पानी बंद।

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सरकार चाहे जितना सख्त कानून बनाए लोगों में जागरूकता उत्पन्न करने का प्रयास करें परंतु रूढ़िवादिता आज भी पूरी तरह से हावी होती दिख रही है जहां पर पंचायतो मे तरह-तरह के फरमान है है मामला सुनाए जा रहे हैं।

समाज का तुगलकी फरमान

ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के सीतापुर से एक सामाजिक उत्पीड़न का मामला सामने आया है. मामला थाना सदरपुर के ग्राम पोखरा कलां का है। यहां कसम खिलाने पर एक परिवार का हुक्का-पानी बंद करने, जुर्माने में एक लाख रुपए तथा सात जवार का खाना खिलाने का तुगलकी फरमान पंचायत ने सुनाया है। इतना ही नहीं, सोनकर बिरादरी के सैकड़ों गांवों में बसे लोगों को फैसले की चिट्ठियां भी भेज दी गई हैं। समाज से बहिष्कृत परिवार भागा-भागा घूम रहा है।

क्या है मामला

सामाजिक उत्पीड़न के इस मामले में सदरपुर थानाक्षेत्र के पोखराकलां गांव निवासी प्रेम पुत्र आशाराम ने बताया कि बीते माह छह दिसम्बर की रात उनके दरवाजे से दो भैंसा चोरी हो गए थे। उसने सात दिसम्बर को सदरपुर थाने में प्रार्थना पत्र भी दिया था। कुछ दिन बीतने के बाद प्रेम को गांव के ही कुछ लोगों पर शक हुआ। गांव वालों ने मिलकर चौपाल आयोजित कर सबको कसम खाने पर सहमति बनाई।

चोरी न करनें की खाई कसम

गांव में स्थित ब्रह्मचारी बाबा के स्थान पर प्रेम ने गांव के कुर्मी, धोबी, कहार, गुप्ता के साथ भार्गव बिरादरी के इंदर पुत्र खुशीराम ने चोरी न करने की कसम खाई। बताया जाता है कि कसम में ये शर्त रखी गई थी कि यदि कसम पूरी नहीं होगी तो जुर्माने में एक लाख रुपए व सात जवार का खाना प्रेम को देना पड़ेगा। कसम में आठ दिन का समय रखा गया था। इधर आठ दिन बीतते ही खटिक बिरादरी के प्रेम के विरुद्ध इंदर ने गांव में क्षेत्रीय बिरादरी के राउत (मुखिया) व नायब (उपमुखिया) को बुलाकर दो बार पंचायत बैठाई। जिसमें प्रेम अपनी समस्याओं को लेकर शामिल नहीं हो पाए। इसी बात को लेकर प्रेम के विरुद्ध पंचायत में यह फैसला सुनाया गया कि कसम पूरी नहीं हुई है। अब प्रेम को जुर्माना अदा करना पड़ेगा और तब तक हुक्का-पानी बिरादरी द्वारा बंद किया जाता है। इस फरमान के लिए बाकायदा चिट्ठी भी भेजी गई।

रूढ़िवादी विचारधाराएं निर्मूल हो

अब सवाल यह उठता है कि प्रेम को कैसे और कहां से मिलेगा न्याय जब रूढ़िवादिता पूर्ण रूप से हावी है,

इसी रूढ़िवादिता के कारण प्रेम न्याय की आस में दर-दर भटक रहा है सरकार चाहे जितना सख्त कानून बनाये चाहे जितना शिक्षा का प्रचार व प्रसार किया जाए परंतु समाज आज भी रूढ़िवादी विचारधाराओं से ग्रसित है इसके लिए स्वयं बुद्धिजीवी वर्गो को आगे आकर मानसिकता बदलना होगा साथ ही साथ ऐसे समाज का निर्माण करना होगा जहां पर सभी सुखी और सुसंपन्न हो तभी रूढ़िवादी विचारधाराएं निर्मूल हो सकेंगी।

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