नोएडा प्राधिकरण के कार्यपालक राकेश मिश्रा ने ली स्वदेशी चाय की चुस्की

नोएडा प्राधिकरण के कार्यपालक राकेश मिश्रा ने ली स्वदेशी चाय की चुस्की

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पुस्तकें व्यक्ति के जीवन की सबसे अच्छी दोस्त मानी जाती है क्योंकि उसमें हम उन शब्दों की मालाओ से आनंदित होते हैं जो भावनाओं की डोर में पिरो कर लोगों के सामने प्रकट किए जाते हैं किताबें व्यक्ति के जीवन शैली एवं मनोदशा पर व्यापक प्रभाव डालती है व्यक्ति बचपन से लेकर जवानी एवं मृत्यु शय्या पर पहुंचने तक किताबों का सहारा लेता रहता है।
“क्या होता है प्यार मुझे तो सिर्फ इतना सा लगता है बार बार आखिर दूर क्यों रहता बस एक भोला नमस्कार।”
नोएडा प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी राकेश मिश्रा ने ऐसी ही “जिंदगी एक कण है”, “अटक गई नींद” और “चलते रहे रात भर” जैसी बेहद रोमांचक किताबें लिखी है।
राकेश मिश्रा नोएडा प्राधिकरण में उच्च पद पर कार्यरत हैं जो एक कवि एवं लेखक भी है जिन्होंने अपनी भावनाओं की डोर में शब्दों की मोती डालकर किताबों की एक माला बना दी, जो जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए एवम् जिंदगी के हर पहलू को जानने के लिए बेहद अच्छी किताब है।
इन किताबों के माध्यम से समाज में बढ़ रहे प्रतिस्पर्धा और व्यक्ति के जीवन में अकेलापन, स्वार्थ भावना भागदौड़ भरी जिंदगी के हर पहलू को दर्शाने का भरपूर प्रयास किया गया है।
राकेश मिश्र की इस किताब से जिंदगी को जीने की एक नई ऊर्जा मिलती है और साथ ही साथ जिंदगी को संयमित तरीके से समझने के हर पहलू पर व्यापक प्रभाव डाला गया है यह किताब हर वर्ग के व्यक्ति के लिए खास रोमांचक सिद्ध हो सकती है।
राकेश कुमार ने अपनी यह पुस्तक स्वदेशी चाय वाला के संस्थापक प्रशांत जोशी पार्थ को भेंट की और वहां पर चाय पर चर्चा भी की क्योंकि चाय के साथ किताबों का बड़ा ही गहरा नाता है हर व्यक्ति चाय की चुस्की के साथ किताबों को पढ़ने का आनंद उठाता है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि चाय किताबों के लिए उतनी ही आवश्यक है जितनी नमक सब्जी के लिए।
इस दौरान प्रशांत जोशी एवं राकेश मिश्रा के बीच तमाम सामाजिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई और सामाजिक पहलुओं को अपने शब्दों के माध्यम से और भी लोगों तक पहुंचाने के इस सकारात्मक विषय पर भी विचार-विमर्श किया गया।
किताबें हर सभ्यता, संस्कृति एवं देश के लिए वह बौद्धिक संपदा है जो हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए पथ प्रदर्शक एवं मार्गदर्शक का कार्य करती है। जिससे हमारी बौद्धिक विचारधारा से और भी लोग सिंचित हो सके।

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